क्यों नहीं है पीएम मोदी के टक्कर का विपक्ष में कोई कैंडिडेट?

Categories Politics, Viral BCPosted on

बीते लगभग तीस साल में यह पहला ऐसा चुनाव है, जब प्रधानमंत्री के अलावा कोई और प्रधानमंत्री का उम्मीदवार नहीं है…

लालू जी जेल में अपनी राजनीति ही नहीं बल्कि जीवन का भी भयावह समय गुजार रहे हैं.

उनके पुत्र तेजस्वी कितनी ही चतुराई दिखा लें. लेकिन वे अपने पिता की राजनीति को आगे नहीं बढ़ा सकते. और उसका दौर भी अब बीत चुका है.

मुलायम सिंह यादव तो टीवी पर सीधे प्रसारण में, करोड़ों लोगों के सामने मोदी जी को फिर से पीएम बनने का आशीर्वाद दे चुके हैं.

जयललिता और करुणानिधि जैसे क्षत्रप अब इस दुनिया में नहीं हैं. ममता बनर्जी अधिक से अधिक 20 सीटें ला सकेंगी. और इतनी सीटों पर उन्हें कौन पीएम बनाएगा और सहयोग कौन देगा?

नवीन पटनायक और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता अपनी पूरी पारी खेल चुके हैं. और यह उनका आख़िरी चुनाव हो सकता है.

Modi
Narendra Modi

मायावती का बुरा दौर

अब अगर इस सीन में सबसे महत्वपूर्ण नेताओं की बात करें तो मायावती का नाम आता है. जिन्हें बीते कई वर्षों से पता नहीं क्यों उन्हें पीएम पद का सशक्त दावेदार बताया जाता है. लेकिन वे ख़ुद अपने राजनीतिक जीवन के सबसे मुश्किल समय से जूझ रही हैं. जहाँ वे अपने गढ़ उत्तर प्रदेश में 80 में से मात्र 36 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस से उन्होंने खुली जंग का ऐलान कर दिया है. और कांग्रेस ने भी इस जंग में चार कदम आगे बढ़कर, भविष्य में मायावती की राजनीति के सबसे बड़े संकट बनने वाले भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर के ऊपर अपनी सरपरस्ती का ‘हाथ’ रख दिया है.

महाराष्ट्र में भी यही हाल

वहीं इस पद के लिए 1991 से चूक रहे दिग्गज मराठा नेता, अपने ही राज्य नहीं बल्कि अपने ही परिवार में उलझ गए हैं. जहाँ उन्हें अपनी सीट अपने भतीजे अजीत पवार के बेटे पार्थ के लिए छोड़नी पड़ी है. वरना उनका समय तो बाद में खराब होता लेकिन ‘घड़ी’ पहले ही खंड-खंड हो जाती.

साइकिल की निकल चुकी है हवा

अखिलेश यादव जो कितनी भी डींगे हाँक लें. लेकिन उनके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि जाति की राजनीति करने वाले अपने पिता जी की पार्टी के मुखिया सिर्फ ‘विरासत’ की वजह से हैं. जाति की राजनीति में यह अयोग्यता ही मानी जाती है. इसलिए बबुआ को अभी से ‘पैदल’ चलने का अभ्यास शुरू कर देना चाहिए. क्योंकि चुनाव के बाद हाथी तो उनको उतार कर फेंक ही देगा. साइकिल के पहिए भी पंचर हो जाएँगे.

rahul vs modi
rahul vs modi

अंत मे, कांग्रेस और बीजेपी के चुनाव प्रचारक “राहुल विन्ची “

राहुल गांधी इस साल कई विवादों मे घिर चुके है. साथ ही साथ नेशनल हेराल्ड और अपनी इटालियन सिटीज़नशिप के मामले मे राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनने का सपना सिर्फ सपना ही रहे जायेगा. महत्पूर्ण बात यह है की राहुल गांधी और सोनिआ गांधी के खिलाफ यह मामला डॉ सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर किया गया है. जो आज तक एक भी केस नही हारे है और 2004 मे सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद से रोकने मे भी उनका ही हाथ था.

Modi

सिर्फ़ मोदी ही विकल्प

ऐसे में सिर्फ एक व्यक्ति बचता है जो अभी प्रधानमंत्री है, और आगे भी हर हाल में प्रधानमंत्री बनना चाहता है. जिसके पास न अब सत्ता और षड्यंत्रों के अनुभवों की कमी है. न संसाधनों की, न समर्थकों की, न ऊर्जा की, न मुद्दों की और न ही दिलेरी की. तब इन हालात में कोई मुझे यह बताए कि आखिर क्यों यह व्यक्ति फिर से पीएम नहीं बनेगा और 300 सीटों के साथ नहीं बनेगा ?

तो एक बार फिर जोर लगाइए, वोट देने घर से निकलिए और लोगों को जागरूक करिये वोट देने के लिए.
एक -एक वोट करेगा चोट

ये पोस्ट U.s. Shukla के फ़ेसबुक पोस्ट से लिया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *