पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट एक ऐसे बंदे को लिया है, जिसने चीन को चुप करा दिया था

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अगले 5 साल के लिए मंत्री चुन लिए गए हैं. कुल 57 सांसद हैं, जिन्हें मंत्री बनाया जाएगा. यानि 353 में से 296 को सांसद सिर्फ़ सासंद रहेंगे बाकी मंत्री भी बन जाएंगे. इस बार की कैबिनेट में कुछ नए चेहरें हैं. लेकिन एक चेहरा ऐसा है. जो किसी पार्टी से नहीं है. बल्कि अपने दिमाग से वो अब मंत्री बनने जा रहे हैं. 1977 बैच के IFS ऑफ़िसर एस.जयशंकर. ये वो इंसान है जिसने डोकलाम, लद्धाख का देपसांग जैसे टफ़ मुद्दों को हैंडल किया था.

हर कोई हैरान

पूर्व विदेश सचिव एस.जयशंकर का मोदी मंत्री मंडल में होना सभी को चौंकाता है. जयशंकर, के सुब्रमण्यम के बेटे हैं जिनकी इंडो-अमेरिका न्यूक्लियर डील कराने में अहम भूमिका थी. ये डील साल 2005 में शुरू हुई थी. साल 2007 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने इस डील पर साइन किए थे.

कई बार रह चुके हैं राजदूत

जयशंकर को साल 2015 जनवरी में सुजाता सिंह की जगह एस. जयशंकर को विदेश सचिव बनाया था. 64 साल के जयशंकर इससे पहले अमेरिका और चीन में भारतीय राजदूत का काम कर चुके हैं. इसके अलावा जयशंकर सिंगापुर के लिए भारतीय उच्च आयुक्त, चेक रिपब्लिक के लिए भारतीय राजदूत थे.

1977 बैच के IFS ऑफ़िसर जयशंकर ने लद्दाख के देपसांग और डोकलाम विवाद को बीजिंग के साथ सही तरह से हैंडल कर अहम भूमिका निभाई थी.

डीयू और जेएनयू से पास आउट

सरकारी नौकरी के बाद टाटा ग्रुप ने जयशंकर को ग्लोबल कॉरपोरेट अफ़ेयर्स का प्रेज़िडेंट बनाया था. डीयू के सेंट स्टीफ़न कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद जयशंकर ने जेएनयू से पॉलिटिक्ल साइंस से एमए और इंटरनेशनल रिलेशंस में एमफ़िल और पीएचडी की थी. साल 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

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